विपक्ष के हंगामे को देख विधानसभा की कार्यवाही कल तक के लिये स्थगित

चंडीगढ़ (उत्तम हिन्दू न्यूज): नए कृषि कानूनों का तोड़ निकालने के लिये किसानों के दबाव मेें बुलाये गये पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के आज पहले दिन विपक्ष के हंगामे को देखते हुये सदन की कार्यवाही कल तक के लिये स्थगित कर दी गई।

सुबह सदन की बैठक शुरू होते ही दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही एक घंटे के लिये स्थगित कर दी गई। उसके बाद जब बैठक शुरू हुई तो सदन में हंगामा शुरू हो गया। आम आदमी पार्टी तथा शिरोमणि अकाली दल पहले से ही मौके की तलाश मेंं थे और उन्हें मौका मिल गया। विपक्षी सदस्यों ने जब केन्द्र द्वारा पारित कृषि कानूनों को खारिज कर इसमें संशोधन कर कोई तोड़ निकालने के लिये सरकार की ओर से बनाये मसौदा बिल की प्रतियां मांगी तो टालमटोल की गई।

विपक्ष का कहना था कि अन्य बिलों की प्रतियां तो उनकी मेज पर आ गयीं लेकिन जिसकी खातिर विशेष सत्र बुलाया गया है ,उसकी प्रतियां सरकार ने उन्हें उपलब्ध क्यों नहीं कराईं। विपक्ष किसानों के मुद्दे पर आज ही बहस कराना चाहता था लेकिन सरकार की तरफ से पूरी तैयारी न होने की वजह से यह मुद्दा कल तक के लिये स्थगित करना पड़ा। इस बात से नाराज अकाली दल ने तो सदन का बहिर्गमन किया और आप पार्टी बिल की प्रति न मिलने के विरोध में सदन में धरना लगाये बैठ गयी और प्रति मिलने तक धरना खत्म न करने की बात कही। आप पार्टी अभी तक सदन में डेरा डाले बैठी है।

जबकि अकाली दल वाकआउट के बाद पंजाब भवन जा पहुंचा जहां तीन मंत्रियों की किसानों से बातचीत चल रही थी क्योंकि सरकार किसानों का पक्ष भी जानना चाहती थी ताकि उसे बिल के मसौदे में डाला जा सके । वहां अकाली दल के सदस्यों को गेट से अंदर नहीं जाने दिया और सुरक्षा कर्मियों के साथ उनकी कहासुनी हुई । इसके विरोध मेंं अकाली सदस्य गेट पर धरने पर बैठ गये।

इससे पहले कांग्रेस तथा अकाली सदस्य किसानों के साथ अपनी निकटता प्रदर्शित करने के लिए ट्रैक्टरों पर विधानसभा पहुंचे। जबकि आप पार्टी के विधायक काला चोगा पहने विधानसभा परिसर में प्रवेश करने लगे तो उन्हें वहीं रोक लिया। बड़ी देर बहस मुबाहिसे के बाद वे अंदर पहुंचे। अकालियों का कहना था कि पंजाब सरकार दिल्ली दरबार को खुश करने में लगी है तथा असली मुद्दे से बचने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस के नेता गुरकीरत कोटली ने कहा कि कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी है और अकाली दल ने केन्द्र से मिलकर ये कानून बनाये और दिखावा करने के लिये अकालियों ने केंन्द्र से इस्तीफा दे दिया । आप पार्टी के सदस्यों ने कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर इसका विरोध किया।