अम्फान के बाद एक और तूफान की आहट, मुंबई में शुरू हुई तेज बारिश-परमाणु संयंत्रों को खतरा

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज)- पश्चिम बांगाल में चक्रवात 'अम्फान' के कहर बरपाने के एक सप्ताह बाद, देश अब एक और चक्रवात का सामना करने के लिए तैयार है, जो महाराष्ट्र और गुजरात के समुद्र तट की ओर बढ़ रहा है। तूफान की वजह से भारी बारिश के साथ तूफानी हवाएं शुरू हो गई हैं। बुधवार को कई इलाकों में भीषण बारिश का अनुमान है। एनडीआरएफ, नेवी समेत तमाम रेस्क्यू एजेंसियां मुस्तैद हैं। पीएम मोदी हालात पर नजर बनाए हुए हैं। गुजरात में इसके लैंडफॉल नहीं करने की संभावना है। इस बीच मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि निसर्ग विकराल रूप ले सकता है। रेड अलर्ट जारी किया गया है। जैसे-जैसे चक्रवात निसर्ग महाराष्ट्र की ओर बढ़ रहा है, न्यूक्लियर और केमिकल प्लान्ट्स की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है क्योंकि ये सीधे संपर्क में आ सकते हैं। पालघर में ही देश का सबसे पुराना तारापुर अटॉमिक पावर कॉम्प्लेक्स है और कई अन्य यूनिट्स भी हैं। 

मुंबई में शुरू हुई तेज बारिश

'निसर्ग' जो वर्तमान में अरब सागर के ऊपर है, का अर्थ प्रकृति है और यह भारत के पड़ोसी देश - बांग्लादेश द्वारा सुझाया गया है। देशों के समूह द्वारा तैयार की गई सूची में इस नाम को जोड़ा गया था। बांग्लादेश ने 'फणि' का भी सुझाव दिया था, जिसने तीन मई, 2019 को ओडिशा में दस्तक दिया था और भारी तबाही मचाई थी। हिंद महासागर में चक्रवातों के नामकरण की शुरुआत 2000 में हुई और 2004 में एक फार्मूले पर सहमति बनी। अगले कुछ चक्रवातों के नाम गति (भारत द्वारा दियानाम), निवार (ईरान), बुरेवी (मालदीव), तौकते (म्यांमार) और यास (ओमान) रखा जाएगा।

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उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम वैज्ञानिक समुदाय और आपदा प्रबंधकों को चक्रवातों की पहचान करने, जागरूकता पैदा करने और प्रभावी ढंग से चेतावनी जारी करने में मदद के लिए दिया जाता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन और एशिया और प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग, 2000 में आयोजित अपने 27वें सत्र में, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नामकरण पर सहमत हुए थे।
बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड पैनल का हिस्सा थे। बाद में 2018 में ईरान, कतर, सऊदी अरब, यूएई और यमन को शामिल किया गया।