अनिल शर्मा का त्यागपत्र

लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद में जब से पंडित सुखराम ने कांग्रेस में घर वापसी करते हुए अपने मंत्री बेटे अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा को मंडी लोकसभा चुनाव क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार घोषित करने में सफलता मिली उसी समय पंडित सुखराम के मंत्री बेटे हिमाचल प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा को नैतिकता के आधार पर मंत्री पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए था। ऐसा हुआ नहीं इसी कारण पिछले करीब दो सप्ताह से मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बीच शह और मात का खेल चल रहा था। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पिछले दिनों पंडित सुखराम व अनिल शर्मा के गढ़ कोटली साइगलू में एक चुनावी जनसभा में बोलते हुए कहा था कि यह कैसी विचित्र स्थिति पैदा हो गई है। भाजपा की जनसभा में भाजपा से चुना हुआ आपका विधायक नहीं है और मेरा मंत्री भी गायब है। इस मौके पर दशकों से पंडित सुखराम व अनिल शर्मा के साथ चलते रहे दर्जनों जनप्रतिनिधियों ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन भी थामा। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि यहां के विधायक मेरे मंत्रिमंडल में मंत्री हैं और वह यह कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री तो कोई भी बन जाता है, मगर नेता कोई कोई ही बन पाता है। इसमें उन्होंने कई वरिष्ठ नेताओं समेत अपने पिता सुखराम का नाम भी लिया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मंत्रियों के सम्मान की चिंता मेरा दायित्व है मगर एक मंत्री होकर मुख्यमंत्री को नेता न माने, इससे तो यह लगता है कि उन्होंने अपने को विचित्र स्थिति में डाल लिया है। वैसे मुझे उनसे सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मंडी के लिए अनिल शर्मा ने जो भी मांगा वह उन्होंने दिया, सिर्फ उनके बेटे को टिकट नहीं दे पाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि हमने अभी कई राज सीने में दबा रखे हैं। ऐसा भी न मानें कि वे सब कुछ कहते रहें और हम सुनते रहें। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अनिल शर्मा की न बेटा और न पिता सुन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ महीने पहले सुखराम उन्हें दिल्ली में अपने पोते के साथ मिले और कहने लगे कि लोकसभा चुनाव आने वाले हैं, वह क्षेत्र के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं, मगर वर्तमन में सांसद रामस्वरूप शर्मा की स्थिति ठीक नहीं है, मैं आपको मजबूत कैंडिडेट देना चाहता हूं और साथ आए अपने पोते की ओर जब इशारा करते हुए कहा कि आश्रय को टिकट दे दें, इसे जिताने की जिम्मेदारी उनकी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले विधानसभा चुनावों में अनिल शर्मा मंडी सदर से उम्मीदवार न होते तो भी भाजपा यहां से जीतती। लोकसभा चुनावों में यह साबित भी हो जाएगा कि मंडी सदर में भाजपा की कितनी ताकत है।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के उपरोक्त ब्यान के बाद अनिल शर्मा ने मंत्री पद से त्यागपत्र दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। मंत्री पद से त्यागपत्र देने के बाद भी अनिल शर्मा अभी भी नैतिक रूप से कमजोर ही दिखाई दे रहे हैं। भाजपा के विधायक होने के बावजूद जब वह भाजपा के लिए प्रचार नहीं करेंगे तो फिर प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा नेतृत्व को कैसे अपना चेहरा दिखा पाएंगे। अनिल शर्मा भाजपा में रहकर अपने बेटे के लिए आज भी मत नहीं मांग सकेंगे, क्योंकि इस से स्थिति बद से बद्तर हो जाएगी। समय की मांग तो यह कहती है कि जिस राह पर उनके पिता पंडित सुखराम और बेटा आश्रय शर्मा चल पड़े हैं, उसी राह पर अनिल शर्मा अपने बाप और बेटे का साथ दें। यह तभी संभव होगा जब वह विधायक पद और भाजपा की सदस्यता से त्यागपत्र देंगे। बिना ऐसा किए अनिल शर्मा अपने परिवार के बनाए चक्रव्यूह में फंसे ही दिखाई देंगे और उनकी स्थिति दयामयी ही दिखाई देगी।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।