कृषि मंत्रालय ने माना की खेती कानून तैयार करने से पहले नहीं लिया किसानों से परामर्श : हरसिमरत

मानसा (उत्तम हिन्दू न्यूज): पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने आज कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने स्वीकार कर लिया है कि तीन खेती कानून तैयार करने से पहले उन्होंने किसानों की सलाह नहीं ली थी, उन्हें तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि मंत्रालय के साथ राईट टू इंफारमेशन से सवाल से पता चल गया है कि उन्होंने कानून बनाने से पहले किसानों से कोई चर्चा नहीं की थी। 'मंत्रालय के पास न तो किसानों की कोई सूची है, यह साबित करने के लिए कि उन्होंने तीन खेती कानून बनाने से पहले किसानों से परामर्श किया था। अकाली दल किसानों के साथ सभी से अनुरोध कर रहा है कि किसानों को प्रभावित करने वाले किसी भी कानून पर निर्णय लेने से पहले विचार किया जाना चाहिए। अब भी भाजपा को दिल्ली की सीमाओं पर कड़कड़ाती ठंड में बैठे किसानों की बात सुननी चाहिए तथा इन्हें रद्द कर देना चाहिए।

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि केंद्र को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि गेहंू तथा धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम न हो, अगर ऐसा किया गया तो किसानों के हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे अकेले किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है। भाजपा ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था लेकिन अगर कृषि क्षेत्र कॉर्पोरेट क्षेत्र को सौंप दिया गया तो यह कम हो जाएगा। 

मीडिया के सवालों के जवाब में बादल ने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है जिसे वापस नहीं लिया जा सके तथा खेती कानूनों को रद्द नहीं किया जा सकता। किसान संगठनों के इस बयान के बारे में एक अन्य सवाल के जवाब में कि उनकी लड़ाई केवल भाजपा के साथ थी इसका शिरोमणी अकाली दल से कोई लेना-देना नहीं है। बादल ने कहा कि कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के संयुक्त प्रयासों से उनके खिलाफ एक प्रेरित विरोध मंच तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि शिरोमणी अकाली दल ने तो अपनी तरफ से केंद्रीय मंत्रिमंडल से अपने एनडीए से बाहर निकलकर इस आंदोलन में अपना योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि हम इस आंदोलन का समर्थन करते रहेंगे तथा इसे और भी अधिक ऊंचाईयों पर लेकर जाएंगे।