केजरीवाल जैसे काम करने की अमरिंदर को सलाह

10:31 AM Feb 17, 2020 |

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत ने कांग्रेस को न सिर्फ दिल्ली बल्कि पंजाब में भी मुश्किल में डाल दिया है। सोशल मीडिया पर सक्रिय पंजाब के युवा अब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सलाह देने लगे हैं कि वे भी अरविंद केजरीवाल की तरह काम करें। मुख्यमंत्री हर रोज करीब एक घंटे का समय अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बिताते हैं। दिल्ली के चुनाव नतीजों के बाद जैसे ही उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट के जरिये पंजाब सरकार की उपलब्धि साझा की, जवाब में पंजाब के लोगों ने उन्हें एक से बढक़र सलाह देनी शुरू कर दी।

मुख्यमंत्री ने फेसबुक पर यह लिखा था कि पंजाब ट्रांसपोर्ट अथारिटी को हमने निर्देश दिए हैं कि अगर अब बसों में भडक़ाऊ, आपत्तिजनक और हिंसा वाले गीत चलाए गए तो उन्हें भारी जुर्माना देना पड़ेगा। साथ ही चालान भी काटे जाएंगे। उन्होंने आगे लिखा-हम किसी भी तरह का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं करेंगे और अगर हमें किसी नियम का उल्लंघन होता दिखाई दिया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फेसबुक पर कैप्टन के इस ऐलान के तुरंत बाद उनके र्पशंसकों ने कई तरह से सुझाव देने शुरू कर दिए।

कुछ ने सलाह दी कि कांग्रेस सरकार पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सुधार लाए तो कुछ ने लिखा कि बसों की हालत बहुत खस्ता है और ड्राइवर-कंडक्टरों का व्यवहार भी अच्छा नहीं है। कुछ प्रशंसकों ने तो सवाल उठाया कि पंजाब में सभी निजी बसें तो मंत्रियों या बड़े सियासतदानों की हैं, इनका चालान कौन काटेगा? कुछ लोगों ने लिखा-कैप्टन साहब को दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की तरह काम करना चाहिए तभी पंजाब का सर्वपक्षीय विकास हो सकेगा। एक प्रशंसक ने लिखा- कांग्रेस सरकार को प्रदेश में सिर्फ दो साल रह गए हैं।

गरीब बच्चों की पढ़ाई के अलावा पूरी शिक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत है। गरीब बच्चों के लिए सरकारी स्कूल तो हैं लेकिन उनमें पढ़ाई नहीं है। एक अन्य प्रशंसक ने लिखा- सूबे में गरीबों को बढिय़ा सेहत सुविधाएं देने के साथ-साथ बिजली के दाम कम किए जाएं अन्यथा कांग्रेस का पंजाब में वही हाल होगा जो दिल्ली में हुआ है। एक अन्य व्यक्ति ने सीधे तौर पर एतराज जताया कि सरकार वह काम करें जो करने वाले हैं। बसों में गीत बंद करने से न तो महंगाई दूर होगी न बिजली सस्ती होगी। तो वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद आप की नजरें एक बार फिर पंजाब पर लग गई हैं। पार्टी इस बार वह गलतियां दोहराना नहीं चाहती, जो पिछले चुनाव के दौरान हुई थीं। आम आदमी पार्टी और नवजोत सिंह सिद्धू दोनों के लिए यह काफी उपयुक्त मौका है। पंजाब में आम आदमी पार्टी का झाड़ू लगातार तीन सालों से बिखर रहा है। पार्टी के आधा दर्जन से ज्यादा विधायक मुख्य ग्रुप को छोड़ चुके हैं। सुखपाल खैहरा, कंवर संधू, सरीखे नेता पार्टी लाइन से अलग चल रहे हैं। पार्टी के पास भगवंत मान को छोडक़र कोई बड़ा चेहरा नहीं है। उन्हें एक बड़े जट्टा सिख चेहरे की तलाश है, जो सिद्धू पूरा कर सकते हैं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह के मनमुटाव के चलते कैबिनेट मंत्री पद छोड़ चुके नवजोत सिंह सिद्धू आम आदमी पार्टी ज्वाइन करेंगे। मंत्री का पद छोडऩे के बाद नवजोत सिंह सिद्धू राजनीतिक गतिविधियों से एकदम दूर हैं। अब आप ने नवजोत सिंह सिद्धू समेत विभिन्न दलों के नेताओं के शामिल होने की तेज हुई अटकलों पर विराम लगा दिया। पार्टी ने साफ कर दिया है कि पार्टी फिलहाल संगठन को मजबूत करने और स्थानीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है, लेकिन कांग्रेस में भी इस बात की चर्चा है कि पार्टी में हाशिए पर लगे सिद्धू आप का झाड़ू थाम सकते हैं। इसीलिए स्टार प्रचारक होने के बावजूद सिद्धू ने कांग्रेस के पक्ष में एक भी रैली नहीं की, क्योंकि वह जानते थे कि उन्हें आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ ही बोलना पड़ेगा। हालांकि, पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान भी आप ने उन्हें पार्टी में शामिल करने की कोशिश की थी, लेकिन पार्टी उन्हें केवल स्टार प्रचारक बनाकर ही रखना चाहती थी। ऐसे में उनकी बात नहीं बनी। अब आप और सिद्धू, दोनों के लिए स्थितियां बदल गई हैं।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने २०१९ में संसदीय चुनाव के बाद सिद्धू को स्थानीय निकाय विभाग से हटाकर उन्हें बिजली विभाग सौंप दिया था। नाराज सिद्धू ने बिजली विभाग ज्वाइन ही नहीं किया और घर बैठ गए। उसके बाद उन्होंने यह कहते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया कि मुख्यमंत्री को उन पर भरोसा ही नहीं है। कांग्रेस ने पहले राजस्थान के चुनाव में और अब दिल्ली के चुनाव में सिद्धू को स्टार प्रचारक बनाया, लेकिन वह किसी भी चुनाव में प्रचार करने नहीं गए। 
सिद्धू के आप में शामिल होने से पहले चर्चा थी कि आम आदमी पार्टी के बागी विधायकों पार्टी में दोबारा शामिल होना चाहते हैं। कहा गया कि सुखपाल सिंह खैरा, कंवर संधू समेत बागी विधायक पार्टी में लौटने के इच्छुक हैं। इन नेताओं ने हालांकि कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया लेकिन आम आदमी पार्टी के प्रति उनका रुख भी काफी नरम दिखाई दिया।     - श्रेष्ठा