गधे की चोरी का अजीबोगरीब मामला, कहानी में Twist देखकर पुलिस को भी लेना पड़ा मंदिर का सहारा

02:47 PM Jul 07, 2020 |

भीलवाड़ा (उत्तम हिन्दू न्यूज): भीलवाड़ा में एक गधे की चोरी (Donkey theft) का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। हालांकि, गधे की चोरी की घटना 5 साल पहले हुई थी, लेकिन इसका पटाक्षेप गत सप्ताह हुआ है। जानकारी के अनुसार मामला पुलिस थाना से होते हुए पशु चिकित्सक और फिर मंदिर (Temple) तक जा पहुंचा। मंदिर में मन की सच्चाई के आधार पर इसका फैसला हुआ कि आखिरकार गधा किसका है। बताया जा रहा है कि पांच साल पहले चोरी हुए इस गधे को लेने के लिए उसके मालिक का पूरा परिवार आया। 

खबर के मुताबिक भीलवाड़ा जिले के चांदखेड़ी गांव निवासी रामदेव बागरिया का गधा 5 साल पहले चोरी हो गया था। 2 जुलाई को रामदेव बागोरिया अपने गांव से कोटड़ी आ रहे थे। इसी दौरान उन्‍हें रास्ते में मानसिंह का झोपड़ा गांव के पास भेड़ों के झुंड के बीच अपना गधा दिखाई दिया। गधे को देखते ही रामदेव ने उसे आवाज लगाई। अपने पूर्व मालिक की आवाज सुनते ही गधा उनके तरफ दौड़ा चला आया। रामदेव ने गधे को कुछ खिलाए और भेड़ों के ग्वाले से गधा वापस लौटने को कहा, लेकिन ग्वाले ने गधा वापस देने से इंकार दिया। इस पर 3 जुलाई को मामला कोटड़ी थाने पहुंच गया। रामदेव ने गधा चोरी होने की रिपोर्ट दे दी। 

इस मामले में पुलिस अधिकार सुरेश चौधरी ने बताया कि गधे चोरी की रिपोर्ट पर दोनों पक्षों को बुलाया गया, लेकिन दोनों पक्षों ने गधे को अपना बताया और आपस में झगड़ने लगे। इस पर दोनों से गधे की उम्र पूछी गई तो वर्तमान मालिक ने इसकी उम्र 7 साल और पूर्व मालिक रामदेव बागरिया ने 12 साल बताई। इसका निर्णय करने के लिए पशु चिकित्सक को बुलाया गया, जिन्होंने गधे की उम्र लगभग 10 वर्ष बताई। 

पूर्व मालिक रामदेव ने पुलिस को अपने गधे के 5 साल पहले के फोटो और उसके इलाज के साक्ष्य भी पेश किए। वहीं गधे के वर्तमान मालिक ने उसको चुराना स्वीकार नहीं किया। इसके बाद यह तय किया गया कि गधे को कोटड़ी के प्रमुख चारभुजानाथ के मंदिर परिसर में बांधते हैं जो इसका असली मालिक होगा वह ईमानदारी से उसे खोलकर ले जाएगा। इस बीच गधे को एक दिन थाने में ही रखा गया। 4 जुलाई को गधे को पुलिस की मौजदूगी में मंदिर में बांध दिया गया। अब पूरा मामला ईमानदारी और सच्चाई पर आकर खड़ा हो गया। दोनों पक्ष वहां आ गये। इस प्रक्रिया में रामदेव अपने गधे को खोलकर कर घर ले गया।  जिसके बाद गधे के वर्तमान मालिक ने कोई विरोध नहीं किया। उधर, रामदेव 5 साल पहले खोए अपने गधे को वापस पाकर झूम उठा। मंदिर में गधे को लेने के लिए रामदेव का पूरा परिवार आया था।