एपीजे कॉलेज में चौथे राजेश्वरी कला मोहत्सव का शानदार आयोजन

को-प्रोमोटर एंव प्रधान सुषमा बर्लिया ने किया मोहत्सव का उद्घायन
130 कलाकृत्तियों में से 35 कलाकृत्तियों का विशेष पुरस्कार के लिए हुआ चयन


जालंधर (सौरभ खन्ना)- भारतीय कला एवं संस्कृति को समृद्ध बनाने वाले एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आटर्स में कला व संस्कृति को जीवंतता प्रदान करने वाले चतुर्थ राजेश्वरी कला महोत्सव का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन एपीजे सत्य व स्वर्ण ग्रुप की प्रधान एवं को-प्रोमोटर सुषमा पॉल बर्लिया ने किया। राजेश्वरी कला महोत्सव में चार कैटागरी नए उभरते कलाकार, प्रोफैशनल्स, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित कलाकार व विशेष रूप से आमंत्रित कलाकारों की 6 प्रतियोगिताओं पेंटिंग, फोटोग्राफी, स्कलप्चर, प्रिंट मेकिंग, डिजीटल आर्ट और ड्राइंग में प्रविष्टियां आमंत्रित की गई थी। इसमें भारत से कश्मीर से कन्याकुमारी तथा 15 विभिन्न देशों नीदरलैंड, अमेरिका, कैनेडा, पौलैंड, फ्रांस, जापान और टर्की से कुल 1200 प्रविष्टियां प्राप्त हुई।  इसमें से 130 कलाकृत्तियों को फाइनल निर्णय के लिए चयनीत किया गया। इन 130 कलाकृत्तियों में से 35 कलाकृत्तियों का विशेष पुरस्कार के लिए चुना गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित 37 कलाकारों की कलाकृत्तियों को अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के लिए आमंत्रित किया गया। कॉलेज के 12 शिक्षकगण ने भी अपने कलाकार्य को इस प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेताओं का चयन करने के लिए निर्णायक की भूमिका प्रो. वी नागदास खैरागढ़, दीवान मन्ना, मदन लाल चंडीगढ़, टूटू पटनायक दिल्ली और एल्बर्ट वैन डर वीडे नीदरलैंड ने निभाई।



समारोह में सबसे पहले कॉलेज प्रिंसीपल डॉ. सुचरिता शर्मा ने सुषमा पाल बर्लिया व अन्य गणमान्य अतिथिवृंद का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आटर्स ने जो आज राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक विशेष पहचान बनाई है, उसके पीछे निसंदेह सुषमा पाल बर्लिया का दिशा-निर्देश, प्रेरणा और प्रोत्साहन है। राजेश्वरी कला महोत्सव की गूंज आज जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है उसका मार्गदर्शन भी हमें बर्लिया से ही प्राप्त हुआ है। इस दौरान सुषमा बर्लिया ने कहा कि राजेश्वरी कला महोत्सव कला के संरक्षण और उत्कृष्टता का ही महोत्सव नहीं है, बल्कि यह नमन है राजेश्वरी जी की महान आत्मा को। जिन्होंने अपने बहुआयामी व्यक्तित्व से डॉ. सत्यपॉल की प्रेरणा के रुप में काम किया। राजेश्वरी की प्रेरणा से स्थापित राजेश्वरी कला संगम आज एपीज कॉलेज ऑफ फाइन आटर्स के वटवृक्ष के रुप में फलफूल रहा है। महोत्सव के शुभावसर पर कॉलेज की वार्षिक पत्रिका "कला सौरभ" कोविड-19 विशेषांक का विमोचन सुषमा बर्लिया ने किया। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के ई-कैटालाग का भी लोकार्पण किया गया। इस दौरान बांसुरी वादक पंडित रोनू मजूमदार और आर्ट फोटोग्राफर दीवान मन्ना को राजेशवरी सम्मान से सम्मानित किया गया। फेसबुक के माध्यम से ऑनलाइन ही अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का वर्चुअल टूयर भी कराया गया। महोत्सव को यादगार बनाने के लिए पंडित रोनू मजूमदार के बांसुरी वादन ने श्रोताओं को आनंदित कर दिया। कॉलेज की वाइस प्रिंसीपल डॉ. सुनीत कौर ने इस समारोह को सफल बनाने के लिए सुषणा बर्लिया और अन्य का आभार व्यक्त किया।