गुरुग्राम के 72 गांवों ने दी चुनाव के बहिष्कार की धमकी

गुरुग्राम (उत्तम हिन्दू न्यूज): हरियाणा राज्य औद्योगिक और आधारभूत संरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) द्वारा किसानों को भूमि अधिग्रहण के लिए दी गई मुआवजे की राशि में से 35 लाख रुपये वापस लिए जाने के नोटिस के बाद गुरुग्राम के आईटी-मानेसर क्षेत्र के 72 गांवों के निवासियों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी दी है। सुप्रीम कोर्ट के 8 फरवरी के आदेश के निर्देशों को पूरा करने के लिए 30 जून, 2019 तक समयबद्ध तरीके से मुआवजे की राशि को वापस करने के लिए नोटिस दिया गया था। 

इस मामले पर ग्रामीणों ने 21 अप्रैल को महापंचायत बुलाने का फैसला किया है। उन्होंने धमकी दी है कि यदि राज्य के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और गरुग्राम क्षेत्र के सांसद राव इंद्रजीत सिंह मसले को नहीं सुलझाते हैं तो 72 गांवों के निवासी 12 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। 

धाना गांव के सरपंच मूलचंद के अनुसार, आईएमटी मानेसर फेज-1 के लिए एचएसआईआईडीसी ने 1,700 एकड़ की जमीन वर्ष 2002-03 में 75 लाख रुपये प्रति एकड़ तय की थी। उन्होंने कहा, चूंकि बजार भाव के हिसाब से यह कीमत कम थी, इसलिए हमने एचएसआईआईडीसी के फैसले को अतरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में चुनौती दी। 

मूलचंद ने बताया कि 27 जनवरी, 2010 को अदालत का फैसला उनके पक्ष में आया, जिसमें अदालत ने राशि बढ़ाकर प्रति एकड़ 2.81 करोड़ रुपये करने का आदेश दिया।" उन्होंने कहा कि लेकिन मामला सात साल तक अदालत में रहा। इस बीच जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। इसलिए किसानों ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया, जहां से प्रति एकड़ मुआवजा राशि 37.4 लाख रुपये तक बढ़ा दिया। लेकिन बाजार भाव से यह कीमत बहुत कम थी, इसलिए किसान 2013 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा राशि प्रति एकड़ 4 लाख बढ़ा दिया। 

बासकुसला गांव के मास्टर देवेंद्र ने कहा कि किसानों ने एचएसआईआईडीसी से मुआवजा राशि ली, लेकिन एक प्राइवेट कंपनी शीर्ष न्यायालय गई और आग्रह किया कि दिया गया मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना में बहुत अधिक है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी, 2019 को एचएसआईआईडीसी से प्रति एकड़ 35 लाख रुपये की अतिरिक्त मुआवजा राशि वापस लेने का आदेश दिया। 

मास्टर ने कहा कि अदालत का अपना ही फैसला बदलना अस्वीकार्य है। हमने 72 गांवों के निवासियों को पत्र लिखा है और उनसे 21 अप्रैल को होने वाली महापंचायत में शामिल होने की अपील की है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने गुरुग्राम क्षेत्र के सांसद राव इंद्रजीत को पत्र लिखकर इस मामले में मदद करने की गुहार लगाई, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया।