Monday, May 20, 2019 02:02 AM

21 विपक्षी दलों को झटका

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने 21 विपक्षी दलों की उस याचिका को खारिज किया है जिसमें विपक्षी दलों ने सर्वोच्च न्यायालय के 8 अप्रैल के आदेश जिस अनुसार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से एक की बजाय 5 मतदान केंद्रों पर ईवीएम से पड़े मतों का वीवीपैट पर्चियों में मिलान करने का आदेश दिया था। इस आदेश अनुसार जब 23 मई को लोकसभा चुनावों की मतगणना होगी तो देश के 10 लाख से अधिक मतकेंद्रों में से करीब 20,600 केंद्रों पर ही यह कवायद होगी। गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने 50 प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों से मिलान करने की मांग की थी जो सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है।

ईवीएम के विरोध में एकजुट हुए राजनीतिक दलों की उपरोक्त मांग को चुनाव आयोग ने भी अस्वीकार किया था और न्यायालय ने अपना उत्तर देते हुए यह तर्क दिया था कि मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है और यदि पचास फीसदी वीवीपैट की पर्चियों के मिलान की मांग को पूरा किया जाता है तो हर विधानसभा क्षेत्र में मतदान के बाद पचास फीसदी वीवीपैट पर्चियों के मिलान की वजह से परिणाम आने में पांच से छह दिन का विलंब हो सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि चुनाव प्रक्रिया विश्वसनीय और पारदर्शी होनी चाहिए। मगर, महज विरोध के लिए बनी-बनाई चुनाव प्रक्रिया के प्रति मतदाताओं के मन में अविश्वास पैदा करना अनुचित ही कहा जायेगा। इससे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की प्रतिष्ठा को भी आंच आती है। ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दलों को ध्यान रखना चाहिए कि ईवीएम तकनीक के जरिये मतदान कराने से जहां समय की भारी बचत हुई है, वहीं मतपत्र लूटने के हिंसक दौर का अंत हुआ, जिसमें सैकड़ों निर्दोष लोग हर आम चुनाव में मार दिये जाते थे।

अभी पीछे हुए विधानसभा चुनावों में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ इत्यादि में विपक्षी दलों को विजय प्राप्त हुई थी। तब भी ईवीएम से मतदान हुआ था। अपनी जीत के समय किसी भी विपक्षी दल ने ईवीएम को लेकर कोई किंतु-परंतु नहीं किया था लेकिन अब शायद हार को लेकर चिंतित यह 21 विपक्षी दल अपने बचाव के लिए वर्तमान व्यवस्था पर ही प्रश्नचिन्ह लगाने का खेल खेल रहे हैं। 

राजनीतिक स्वार्थसिद्धि के लिए एकत्रित हुए 21 विपक्षी दल यह भूल रहे हैं कि उन द्वारा उठाए उपरोक्त कदम से देश व दुनिया में भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली व व्यवस्था को लेकर बिना कारण भ्रम व भ्रांतियां फैल रही हैं। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और पिछले सात दशकों में इतने बड़े देश में जिस तरह चुनावों द्वारा सत्ता का परिवर्तन हुआ है उससे विश्व हैरान है और हम भारतीय गर्व महसूस करते हैं। विपक्षी दलों की बात को ध्यान में रखते हुए अगर यह मान भी लिया जाए कि ईवीएम मशीनें खराब हो सकती हैं या उनका एक आध प्रतिशत गलत इस्तेमाल हो सकता है तब भी मांग तो त्रुटियों को दूर करने की होनी चाहिए।

वर्तमान दौर में वापस पर्चियों को अपनाना हमारी रूढि़वादी सोच को ही दर्शाएगा। हार-जीत चुनाव का हिस्सा है। प्रत्येक राजनीतिक दल का लक्ष्य सत्ता हासिल करना ही होता है लेकिन सत्ता हासिल करने के लिए कौन से तरीके अपनाये जाते हैं उनका भी अपना महत्व होता है। राजनीतिक दल की पहचान उसकी विचारधारा और विचारधारा को मजबूत करने के लिए कौन से ढंग व नीति दल अपनाता है उससे उसकी साख व छवि कमजोर या मजबूत होती है। ईवीएम के विरोध में एकजुट हुए विपक्षी दलों को न्यायालय ने जो झटका दिया है उससे ही विपक्षी दलों को समझ लेना चाहिए कि वह एक नकारात्मक खेल खेल रहे हैं जिससे उनकी छवि कमजोर हो रही है। समय की मांग है कि नकारात्मक खेल को छोड़ वह चुनाव के शेष रह गए दो चरणों के लिए जनता की कचहरी में जाएं और अपनी बात रखें। चुनाव परिणाम जो भी आये उसे जनता का फैसला मानकर स्वीकार भी करें।

-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

देश की सबसे बड़ी और तेज WhatsApp News Service से जुड़ने के लिए हमारे नंब 7400023000 पर Missed Call दें। इस नंबर को Save करना मत भूलें।