धर्मक्षेत्र कुरूक्षेत्र में 18 हजार विद्यार्थियों ने किया 18 अध्यायों के 18 श्लोकी वैश्विक गीता पाठ

कुरुक्षेत्र (सरबजोत दुग्गल) - मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव पर पवित्र ग्रंथ गीता के 18 अध्यायों के 18 श्लौकों के वैश्विक गीता पाठ 18 हजार विद्यार्थियों द्वारा किया गया। इस वैश्विक गीता पाठ को गीता जयंती पर हर घर में किया जाए, इसके लिए गीता महोत्सव 2020 को हरियाणा के हर जिले में गीता जयंती पर 3 दिनों में सामूहिक वैश्विक गीता पाठ का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, जूना पीठ के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी महाराज, बाबा भूपेन्द्र सिंह के सहयोग से आगामी वर्ष से देश के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में भी 3 दिवसीय वैश्विक गीता पाठ व अन्य कार्यक्रम करने का प्रयास किया जाएगा।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल रविवार को थीम पार्क में अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव पर वैश्विक गीता पाठ कार्यक्रम में सम्बोधित कर रहे थे। इससे पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उतराखंड की राज्यपाल बेबी रानी, स्वामी ज्ञानानंद जी महारज, महामंडलेश्वर अवधेशानंद जी महाराज, खेलमंत्री संदीप सिंह, सांसद नायब सिंह सैनी, विधायक सुभाष सुधा, विधायक कमल गुप्ता, मुख्यमंत्री के राजनैतिक सचिव कृष्ण कुमार बेदी, उपायुक्त डा. एसएस फुलिया, केडीबी मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा, एडीसी पार्थ गुप्ता, सीईओ केडीबी गगनदीप सिंह, आरएसएस के विभाग सह कार्यवाह डा. प्रीतम सिंह ने दीपशिखा प्रज्जवलित कर 18 श्लौकी वैश्विक गीता पाठ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस दौरान सभी विद्यार्थियों को बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड लंदन तथा वैश्विक गीता पाठ से अंकित मैडल भी प्रदान किए गए।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वैश्विक गीता पाठ में शिरकत करने वाले विद्यालयों में सोमवार को एक दिन का अवकाश करने की घोषणा भी की है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि पिछले वर्ष इसी जगह इसी समय 18 विद्यार्थियों के वैश्विक गीता पाठ को बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड लंदन में दर्ज किया गया। इस रिकार्ड से अंकित मैडल विद्यार्थियों को दिया गया है। सरकार पूरी दुनिया में गीता के प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रही है। आज गीता जयंती पर भारतीय समयानुसार 12 बजे बहुत से देशों में पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों की गंूज सुनी जा रही है। इन श्लोकों की तरंगों से पूरी मानव जाति का कल्याण होगा। पवित्र ग्रंथ गीता एक धर्मगं्रथ ही नहीं है, अपितू यह ग्रंथ जीवन जीने की एक शैली और इसके उपदेश शास्वत और अमर है, जो पूरे विश्व को ज्ञान का संदेश दे रहे है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में कानून काल और परिस्थिति के अनुसार बदलते रहते है और भरतीय संविधान में अब तक 100 संसोधन हो चुके है, लेकिन पवित्र ग्रंथ गीता ही एक ऐसा ग्रंथ है जो कभी भी परिवर्तित नहीं होगा। आज से 5157 वर्ष पूर्व इसी धरा से भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता के जो उपदेश दिए थे, उन्ही उपदेशों का अनुसरण आज भी पूरी दुनिया कर रही है। उन्होंने कहा कि कुरुक्ष्ेात्र में अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव पर लगभग 17 दिनों के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। राज्य सरकार का प्रयास रहेगा कि गीता महोत्सव 2020 में गीता जयंती के दिन हरियाणा के हर जिले में चाहे लघु स्वरुप हो, 3 दिवसीय सामूहिक वैश्विक गीता पाठ का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा देश के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में भी गीता जयंती के अवसर 3 दिवसीय वैश्विक गीता पाठ और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए, इसके लिए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, महामंडलेश्वर अवधेशानंद जी महाराज, बाबा भूपेन्द्र सिंह प्रयास करेंगे।

उन्होंने कहा कि लगभग 20 देशों में अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव की भागीदारी रही है और फरवरी 2019 में मारीशिस और फिर लंदन में गीता महोत्सव का आयोजन किया गया। अब मार्च 2020 में आस्टे्रलिया और जुलाई में कनाडा में गीता महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष नेपाल ने सहभागी देश के रुप में अपनी भागीदारी की है और नेपाल सरकार ने आश्वासन दिया है कि नेपाल में भी 3 दिनों के लिए गीता जयंती का आयोजन किया जाएगा। उतराखंड की राज्यपाल बेबी रानी ने कहा कि कुरुक्षेत्र की धरा पवित्र ग्रंथ गीता की जननी है, इस भूमि पर दिए गए गीता उपदेश आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है। राज्य सरकार की तरफ से गीता जयंती को अंतर्राष्टï्रीय स्वरुप दिया गया है और मारीशिस और लंदन में इस महोत्सव का आयोजन किया जा चुका है। कार्यक्रम के लिए उतराखंड को सहभागी राज्य के रुप में देखना एक सौभाग्य का विषय है। देवभूमि उतराखंड और उपदेश स्थली कुरुक्षेत्र का संगम अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि पवित्र गंथ गीता हिन्दु सभ्यता के लिये ही नहीं, पूरी मानव जाति के लिये प्रेरणादायक है। आज 45 देशों के 100 विद्यार्थी हिन्दी और संस्कृत का ज्ञान लेने के लिये उत्तराखंड में पहुंचे हैं। यह विद्यार्थी गीता का ज्ञान लेकर अपने-अपने देश में जाकर ग्रंथ गीता के उपदेशों के प्रचार-प्रसार करेेंगे। इस प्रकार के प्रयासों से गीता पूरे विश्व का ग्रंथ बन जायेगा।

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज ने कहा कि आज के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की भूमि से पूरी मानवता को गीता के उपदेश दिया। अनादिकाल से तीर्थ परम्परा में अलग पहचान रखने वाले कुरुक्षेत्र की भूमि पर महाभारत के समय श्रीकृष्ण ने गीता उपदेश दिये जो आज भी पूरी तरह प्रासंगिक और प्ररेणादायक हैं। सरकार की तरफ से पिछले चार सालों से गीता जयंती को अंतर्राष्टï्रीय महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है और तीन सालों से सेमिनार, विभिन्न प्रकार के अनुष्ठïान और केडीबी के सौजन्य से विभिन्न कार्यक््रमों का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन गीता जयंती के दिन 18 हजार विद्यार्थियों का वैश्विक गीता पाठ सबसे अहम कार्यक्रम है। अठारह अध्यायों के 18 श्लोकों का उच्चारण करके पिछले वर्ष विश्व रिकॉर्ड भी बन चुका है। जूनापीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द जी महाराज ने कहा कि सरकार और स्वामी ज्ञानानन्द के प्रयासों से गीता जयंती को अंतर्राष्टï्रीय स्वरूप मिला है।

इस प्रकार के कार्यक्रमों से आने वाले कुछ सालों में भारत की संस्कृति को विशेष दर्जा मिलेगा। बॉस्टन की एक अखबार ने उल्लेख भी किया है कि आज भारत की सभ्यता सबसे तेज गति से विकसित हो रही है। इतना ही नहीं, अब मुस्लिम देशों में भी पवित्र ग्रंथ गीता की आवाज उठने लगी है। इस ग्रंथ को पूरी मानवता के कल्याण के रूप में देखा जा रहा है। आज भी 18 देशों में प्राइमरी शिक्षा में गीता का पाठ पठाया जा रहा है। आज प्रत्येक व्यक्ति के लिये गीता का ज्ञान बहुत जरूरी है। सांसद नायब सिंह सैनी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की कर्मस्थली कुरुक्षेत्र में महाभारत के दौरान गीता के उपदेश दिये गये। यह संदेश पूरी मानव जाति को ज्ञान का संदेश दे रहे हैं। थानेसर विधायक सुभाष सुधा ने मेहमानो का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव के आयोजन को एक बड़ा स्वरूप मिला है।